अपनी इष्ट देवता कैसे पहचानें? जानें कुंडली और अंतरात्मा की आवाज़ से सही तरीका

Ishta Devta

क्या आपके मन में भी कभी यह सवाल आया है कि “आखिर मेरे असली भगवान कौन हैं?” हिंदू धर्म में 33 कोटि देवी-देवता हैं, और अक्सर हम इस दुविधा में रहते हैं कि किसकी पूजा करने से हमें सबसे अधिक शांति और फल मिलेगा।

इष्ट देवता (Ishta Devta) का अर्थ है वह देवता जो आपकी आत्मा के सबसे करीब हों। वे केवल पूजा का विषय नहीं हैं, बल्कि वे आपके मार्गदर्शक हैं जो आपको मोक्ष की ओर ले जाते हैं।

इस आर्टिकल में, हम जानेंगे कि आप अपनी जन्म कुंडली और अपने अनुभवों के आधार पर अपने इष्ट देव को कैसे पहचान सकते हैं।

1. इष्ट देवता कौन होते हैं और इन्हें जानना क्यों जरूरी है?

सरल शब्दों में कहें तो, इष्ट देवता वह ईश्वरीय शक्ति हैं जिनके साथ आपका पिछले जन्मों का गहरा संबंध होता है। कई बार आपने महसूस किया होगा कि किसी विशेष मंदिर में जाकर आपको अलग ही शांति मिलती है, या किसी विशेष भगवान की आरती सुनकर आपकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। यह संयोग नहीं है, यह आपके इष्ट का संकेत है।

इष्ट देव की पूजा करने से:

  • पूजा का फल बहुत जल्दी मिलता है।
  • कठिन समय में मानसिक संबल मिलता है।
  • अध्यात्म और साधना में प्रगति होती है।

2. अपनी कुंडली से इष्ट देवता कैसे पता करें? (Astrological Method)

ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में इष्ट देवता का पता लगाने का सबसे सटीक तरीका आपकी जन्म कुंडली (Birth Chart) है। ज्योतिष के अनुसार, कुंडली का 5वां भाव (5th House) पूर्व पुण्य और इष्ट का भाव होता है।

यहाँ एक सामान्य गाइड दी गई है कि पंचम भाव में कौन सा ग्रह होने पर (या उस राशि के स्वामी के अनुसार) कौन से देवता आपके इष्ट हो सकते हैं:

  • सूर्य (Sun): यदि 5वें भाव में सूर्य हो या सिंह राशि हो, तो आपके इष्ट भगवान विष्णु या भगवान राम हैं।
  • चंद्रमा (Moon): चंद्रमा होने पर भगवान शिव या माता पार्वती की आराधना करें।
  • मंगल (Mars): मंगल होने पर हनुमान जी या भगवान कार्तिकेय आपके इष्ट देव हो सकते हैं।
  • बुध (Mercury): बुध ग्रह भगवान विष्णु या श्री गणेश का कारक है।
  • गुरु (Jupiter): गुरु होने पर भगवान विष्णु, दत्तात्रेय या साईं बाबा जैसे गुरु रूप की पूजा करें।
  • शुक्र (Venus): शुक्र होने पर माता लक्ष्मी, माँ दुर्गा या गौरी माता आपकी इष्ट हो सकती हैं।
  • शनि (Saturn): शनि के लिए भगवान शिव, भैरव बाबा या हनुमान जी की पूजा श्रेष्ठ है।
  • राहु (Rahu): राहु के लिए माँ दुर्गा या माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।
  • केतु (Ketu): केतु के लिए भगवान गणेश की आराधना मोक्षदायक होती है।

(नोट: यह एक सामान्य नियम है। सटीक जानकारी के लिए आत्मकारक ग्रह (Atmakaraka Planet) का विश्लेषण भी किया जाता है।)

3. बिना कुंडली के इष्ट देवता को कैसे पहचानें? (Spiritual Signs)

अगर आपके पास जन्म कुंडली नहीं है या समय सही नहीं पता, तो घबराएं नहीं। आपकी अंतरात्मा और आपके अनुभव सबसे बड़े ज्योतिषी हैं। इन संकेतों पर गौर करें:

मुसीबत में किसका नाम याद आता है?

जब आप अचानक किसी संकट में फंसते हैं या डर जाते हैं, तो जुबान पर अनायास किसका नाम आता है? “हे राम”, “हे शिव”, या “हे माता दी”? जो नाम सबसे पहले निकले, वही आपके रक्षक हैं।

किस स्वरूप को देखकर शांति मिलती है?

कभी-कभी हम बाज़ार में या इंटरनेट पर भगवान की तस्वीरें देखते हैं। किसी एक तस्वीर पर आपकी नज़र टिक जाती है और मन में एक अजीब सा खिंचाव या सुकून महसूस होता है। वह खिंचाव आपके इष्ट का संकेत है।

भजन और कीर्तन में रूचि

आपको किस भगवान के भजन गुनगुनाना सबसे अच्छा लगता है? किसके भजनों में आप खो जाते हैं? यह जुड़ाव बताता है कि आपकी फ्रीक्वेंसी (Frequency) किस देवता से मैच करती है।

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4. कुलदेवी/कुलदेवता और इष्ट देवता में अंतर

बहुत से लोग कुलदेवता और इष्ट देवता में कंफ्यूज हो जाते हैं। इसे समझना जरुरी है:

  • कुलदेवता: ये आपके कुल या वंश के रक्षक हैं। इनका निर्धारण आपके जन्म के परिवार से होता है। इनकी पूजा परिवार की सुरक्षा और वंश वृद्धि के लिए अनिवार्य है।
  • इष्ट देवता: ये आपकी व्यक्तिगत पसंद और पिछले जन्म के संस्कारों से जुड़े हैं। इनका चुनाव आपकी आत्मा करती है।

सलाह: कुलदेवता की पूजा कभी बंद न करें, लेकिन अपनी व्यक्तिगत साधना और मंत्र जाप इष्ट देवता का करें।

5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: क्या हम एक से अधिक इष्ट देवता रख सकते हैं?

उत्तर: आदर आप सभी का करें, लेकिन ‘इष्ट’ (Goal) एक ही होना चाहिए। जैसे एक ही नाव में पैर रखने से नदी पार होती है, वैसे ही एक निष्ठ होकर किसी एक स्वरुप की पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति जल्दी होती है।

Q2: अगर मुझे अपना इष्ट पता चल जाए, तो बाकी देवताओं की पूजा छोड़ देनी चाहिए?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। हिंदू धर्म में हम सबका सम्मान करते हैं। आप दिवाली पर लक्ष्मी जी और शिवरात्रि पर शिव जी की पूजा करें, लेकिन आपका नित्य ‘मंत्र जाप’ या ध्यान आपके इष्ट का ही होना चाहिए।

Q3: क्या मैं अपना इष्ट देवता बदल सकता हूँ?

उत्तर: बार-बार देवता बदलने से आपकी साधना खंडित होती है। इसे ऐसे समझें—जैसे बार-बार जगह बदलकर कुआं खोदने से पानी नहीं मिलता, वैसे ही बार-बार भगवान बदलने से भक्ति गहरी नहीं हो पाती। एक बार जिसे चुन लें, जीवन भर उसी का दामन थामे रहें।

निष्कर्ष (Conclusion)

अपने इष्ट देवता को पहचानना कोई जटिल गणित नहीं है, यह प्रेम और समर्पण की यात्रा है। चाहे आप कुंडली का सहारा लें या अपने मन की आवाज़ का, अंत में महत्वपूर्ण यह है कि आप उस शक्ति पर अटूट विश्वास रखें।

अगर आप अभी भी असमंजस में हैं, तो हनुमान जी या भगवान गणेश की पूजा से शुरुआत करें। वे विघ्नहर्ता हैं और वे ही आपको आपके सही इष्ट तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

क्या आपको यह जानकारी उपयोगी लगी? अपने विचार कमेंट में जरूर लिखें और इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी अपने इष्ट की तलाश में हैं।

next – लक्ष्मी जी की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

1 thought on “अपनी इष्ट देवता कैसे पहचानें? जानें कुंडली और अंतरात्मा की आवाज़ से सही तरीका”

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