
क्या आपने कभी सोचा है कि जब भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था, तब उनके उस महा-क्रोध को किसने शांत किया? या फिर वो कौन सी देवी हैं जिनका मुख शेर का और शरीर स्त्री का है?
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं माता नरसिंही की।
हिंदू धर्म में कई देवियां हैं, लेकिन नरसिंही देवी (Narasimhi Devi) का स्वरूप और उनकी शक्ति सबसे अलग और रहस्यमयी है। तंत्र साधना और शक्ति की उपासना करने वाले भक्त उन्हें भली-भांति जानते हैं। आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर नरसिंही देवी कौन हैं, उनकी उत्पत्ति कैसे हुई और क्यों उन्हें संकटों का नाश करने वाली देवी कहा जाता है।
1. कौन हैं नरसिंही देवी? (Who is Goddess Narasimhi)
सरल शब्दों में कहें तो नरसिंही देवी, भगवान नृसिंह की शक्ति हैं। जैसे शिव की शक्ति पार्वती (शिवा) हैं और विष्णु की शक्ति लक्ष्मी (वैष्णवी) हैं, वैसे ही भगवान नृसिंह की उग्र शक्ति को ‘नरसिंही’ कहा जाता है।
पुराणों के अनुसार, उन्हें ‘सप्त मातृकाओं’ (सात दैवीय माताएं) में से एक माना गया है। इनका स्वरूप बेहद उग्र और शक्तिशाली है:
- चेहारा: शेरनी (Lioness) जैसा।
- शरीर: मानवी (स्त्री) का।
- हाथ: चार भुजाएं, जिनमें वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।
- स्वभाव: अपने भक्तों के लिए माँ की तरह सौम्य, लेकिन शत्रुओं और बुरी शक्तियों के लिए काल समान।
2. क्या नरसिंही और प्रत्यंगिरा देवी एक ही हैं?
यह एक ऐसा सवाल है जिसे लेकर अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं। ज्यादातर मान्यताओं और तांत्रिक ग्रंथों में नरसिंही और प्रत्यंगिरा देवी को एक ही माना जाता है। दोनों का स्वरूप (सिंह मुख) समान है।
- वैष्णव परंपरा में उन्हें भगवान नृसिंह की क्रोधग्नि से उत्पन्न शक्ति माना जाता है जो उनकी पत्नी और शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं।
- शैव परंपरा (और शरभ अवतार की कथा) में, उन्हें भगवान शिव के ‘शरभ’ अवतार के पंखों से प्रकट हुई ‘प्रत्यंगिरा’ कहा जाता है, जिन्होंने नृसिंह भगवान के क्रोध को शांत किया था।
नाम चाहे जो भी हो, यह शक्ति बुराई, काले जादू और शत्रुओं के नाश के लिए जानी जाती है।
3. पौराणिक कथा: जब भगवान नृसिंह का क्रोध शांत नहीं हुआ
एक बहुत प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान नृसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया, तब भी उनका क्रोध शांत नहीं हो रहा था। उनके गुस्से से तीनों लोक कांपने लगे। देवता घबरा गए कि कहीं नृसिंह भगवान के क्रोध से सृष्टि का विनाश न हो जाए।
तब भगवान शिव ने ‘शरभ’ (आधा पक्षी, आधा शेर) का अवतार लिया, लेकिन नृसिंह भगवान का क्रोध फिर भी कम नहीं हुआ। अंत में, एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई – नरसिंही (प्रत्यंगिरा)। उन्होंने अपनी हुंकार और शक्ति से भगवान नृसिंह को शांत किया। यह शक्ति और कोई नहीं, स्वयं आदि शक्ति का ही एक रौद्र रूप था।
4. नरसिंही देवी की पूजा क्यों की जाती है? (Benefits of Worship)
आज के समय में जब लोग ईर्ष्या, नजर दोष या गुप्त शत्रुओं से परेशान होते हैं, तो नरसिंही देवी की शरण लेते हैं। इनकी उपासना से मुख्य रूप से ये लाभ मिलते हैं:
- शत्रु बाधा से मुक्ति: अगर कोई शत्रु आपको अकारण परेशान कर रहा है, तो माँ नरसिंही की पूजा ‘रामबाण’ मानी जाती है।
- तन्त्र-मन्त्र और नजर दोष: यह देवी तन्त्र क्रियाओं को काटने वाली (प्रतियंगिरा – जो वार को वापस लौटा दे) मानी जाती हैं।
- आत्मविश्वास और साहस: इनकी पूजा करने वाले साधक के अंदर से डर खत्म हो जाता है।
5. नरसिंही देवी का मंत्र (Narasimhi Devi Mantra)
माँ नरसिंही को प्रसन्न करने के लिए एक सरल लेकिन प्रभावशाली मंत्र है। इसका जाप पूरी पवित्रता और सावधानी के साथ करना चाहिए:
“ॐ उग्र-रूपायै विद्महे, वज्र-नखायै धीमहि। तन्नो नरसिंही प्रचोदयात्॥”
सावधानी: नरसिंही देवी एक ‘उग्र देवी’ हैं। इनकी साधना घर में सामान्य पूजा की तरह नहीं करनी चाहिए। सात्विक रूप से केवल नाम जाप करें। अगर आप कोई विशेष अनुष्ठान या हवन करना चाहते हैं, तो किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
माता नरसिंही केवल एक पौराणिक देवी नहीं हैं, बल्कि वे प्रतीक हैं उस शक्ति का, जो हमारे भीतर के डर को खत्म करती है। वे हमें सिखाती हैं कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो (जैसे हिरण्यकश्यप), उसका अंत निश्चित है।
अगर आप भी जीवन में किसी अनजाने डर या बाधा से जूझ रहे हैं, तो माँ नरसिंही का ध्यान करें। वे आपकी रक्षा अवश्य करेंगी।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। किसी भी विशेष तांत्रिक प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
Next – कर्ण पिशाचिनी साधना: रहस्य,



Pingback: काली मां का असली रूप – तांत्रिक रहस्य और शास्त्रों की व्याख्या -