
जानिए जीवन, दिनचर्या, भोजन, उपदेश और उनसे जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रश्न
आज के समय में जब लोग मानसिक तनाव, भय और उलझनों से घिरे हुए हैं, तब संत-महापुरुषों की वाणी लोगों के लिए सहारा बनती है। ऐसे ही एक प्रसिद्ध संत हैं प्रेमानंद जी महाराज, जिनके प्रवचन, सादगी भरा जीवन और “नाम जप” का संदेश लाखों लोगों को प्रभावित करता है।
इंटरनेट पर उनके बारे में कई सवाल पूछे जाते हैं। इस लेख में हम उन्हीं सवालों के सही, सरल और संतुलित उत्तर देने की कोशिश करेंगे।
प्रश्न 1: प्रेमानंद जी महाराज का जीवन परिचय क्या है?
उत्तर:
प्रेमानंद जी महाराज एक प्रसिद्ध संत और आध्यात्मिक गुरु हैं, जो भक्ति, प्रेम और नाम जप का संदेश देते हैं। उनका जीवन बहुत ही सादा, संयमित और भगवान-केंद्रित रहा है।
वे दिखावे, प्रचार और भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर रहकर भक्ति मार्ग को ही सर्वोपरि मानते हैं। उनके प्रवचनों में शांति, प्रेम, त्याग और भगवान के नाम का विशेष महत्व मिलता है।
प्रश्न 2: प्रेमानंद जी महाराज पहले क्या करते थे?
उत्तर:
महाराज जी के जीवन के प्रारंभिक समय में उन्होंने सामान्य पारिवारिक जीवन जिया। जैसे अधिकांश लोग करते हैं—पढ़ाई, जिम्मेदारियाँ और समाज के नियम।
लेकिन भीतर से उनके मन में वैराग्य और ईश्वर-भक्ति का भाव प्रबल होता गया। धीरे-धीरे उन्होंने सांसारिक आकर्षणों को त्याग कर पूर्ण रूप से आध्यात्मिक मार्ग को अपना लिया।
प्रश्न 3: प्रेमानंद जी महाराज के कितने भाई थे?
उत्तर:
यह प्रश्न लोग अक्सर जिज्ञासा के कारण पूछते हैं, लेकिन महाराज जी स्वयं कभी अपने पारिवारिक संबंधों को प्रमुखता नहीं देते।
वे मानते हैं कि संत का असली परिवार पूरी मानवता होती है, इसलिए व्यक्तिगत पारिवारिक विवरण सार्वजनिक रूप से बहुत कम उपलब्ध है।
प्रश्न 4: प्रेमानंद जी महाराज का घर कहाँ है?
उत्तर:
प्रेमानंद जी महाराज किसी भव्य घर या आलीशान भवन में नहीं रहते। उनका जीवन अत्यंत सादा है।
वे अधिकतर आश्रम या साधना स्थल से जुड़े रहते हैं, जहाँ से वे प्रवचन और दर्शन देते हैं। उनके लिए “घर” वही जगह है जहाँ भगवान का नाम लिया जाए।
प्रश्न 5: प्रेमानंद जी महाराज की दिनचर्या क्या थी?
उत्तर:
महाराज जी की दिनचर्या बहुत अनुशासित और सरल मानी जाती है:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठना
- नाम जप और ध्यान
- शास्त्र अध्ययन या मौन साधना
- भक्तों को उपदेश देना
- सीमित भोजन
- रात में विश्राम
उनका पूरा दिन भगवान के स्मरण और सेवा में ही व्यतीत होता है।
प्रश्न 6: क्या प्रेमानंद जी महाराज रात को दर्शन करते थे?
उत्तर:
हाँ, कई बार विशेष अवसरों या भक्तों की भावनाओं को देखते हुए महाराज जी रात में भी दर्शन देते थे।
लेकिन वे मानते हैं कि दर्शन का असली अर्थ शारीरिक उपस्थिति नहीं, बल्कि मन से भगवान को याद करना है।
प्रश्न 7: प्रेमानंद जी महाराज रात में कितने बजे सोते हैं?
उत्तर:
संतों की नींद आम लोगों जैसी नहीं होती।
महाराज जी बहुत कम समय विश्राम करते थे और जल्दी उठ जाते थे। उनका सोने-जागने का समय शरीर नहीं, बल्कि साधना के अनुसार चलता था।
प्रश्न 8: प्रेमानंद जी महाराज क्या खाते हैं?
उत्तर:
प्रेमानंद जी महाराज का भोजन बहुत सादा होता है:
- सात्विक
- सीमित मात्रा में
- बिना स्वाद-लालसा के
वे खाते हैं ताकि शरीर साधना का माध्यम बना रहे, न कि भोग का साधन।
प्रश्न 9: प्रेमानंद जी महाराज को कौन-सी बीमारी थी?
उत्तर:
यह सच है कि महाराज जी का शरीर कई बार अस्वस्थ रहा, लेकिन उन्होंने कभी बीमारी को बड़ा मुद्दा नहीं बनाया।
वे कहते थे:
“शरीर नश्वर है, लेकिन नाम अमर है।”
बीमारी के बावजूद भी उनकी साधना और भक्ति में कोई कमी नहीं आई।
प्रश्न 10: प्रेमानंद जी महाराज का प्रेम क्या है?
उत्तर:
यहाँ “प्रेम” का अर्थ सांसारिक प्रेम नहीं है।
महाराज जी के अनुसार प्रेम का मतलब है—
- निस्वार्थ भक्ति
- अहंकार का त्याग
- भगवान में पूर्ण समर्पण
उनका प्रेम ईश्वर के प्रति है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के प्रति।
प्रश्न 11: प्रेमानंद जी महाराज के चेले कौन थे?
उत्तर:
महाराज जी किसी को औपचारिक चेला बनाने पर ज़ोर नहीं देते थे।
जो व्यक्ति उनके उपदेशों को जीवन में उतारता है, वही उनका सच्चा शिष्य माना जाता है।
प्रश्न 12: क्या विराट कोहली प्रेमानंद जी महाराज से मिले थे?
उत्तर:
इस विषय पर सोशल मीडिया पर कई चर्चाएँ और वीडियो वायरल हुए हैं।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार विराट कोहली महाराज जी से मिले थे, लेकिन इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
महाराज जी स्वयं ऐसी बातों को महत्व नहीं देते और कहते हैं कि भक्ति प्रसिद्धि से नहीं, भावना से होती है।
प्रश्न 13: प्रेमानंद जी महाराज जी कितने साल के हो गए थे?
उत्तर:
उनकी सही जन्म-तिथि सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
लेकिन उम्र से अधिक महत्वपूर्ण उनका अनुभव, वैराग्य और आध्यात्मिक परिपक्वता है।
प्रश्न 14: प्रेमानंद जी महाराज नाम जप को इतना महत्व क्यों देते थे?
उत्तर:
महाराज जी कहते थे:
“कलियुग में न साधन आसान हैं, न मन स्थिर है।
लेकिन नाम जप हर किसी के लिए संभव है।”
उनके अनुसार नाम जप से:
- मन शुद्ध होता है
- भय दूर होता है
- भगवान से सीधा संबंध बनता है
निष्कर्ष (Conclusion)
प्रेमानंद जी महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि सादगी, प्रेम और भक्ति का जीवंत उदाहरण हैं।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि:
- सच्ची शांति बाहर नहीं, भीतर है
- नाम जप सबसे सरल साधना है
- दिखावा नहीं, भावना महत्वपूर्ण है
यदि हम उनके संदेश का थोड़ा सा अंश भी जीवन में उतार लें, तो जीवन निश्चित ही सरल और शांत हो सकता है।
Next – प्रेमानंद जी महाराज जैसे संत साधारण जीवन क्यों जीते हैं?

