लक्ष्मी पूजा में अक्सर होती हैं ये 10 गलतियाँ: धन लाभ के लिए जानिए सही नियम और उपाय

 धन लाभ के लिए जानिए सही नियम और उपाय

हम सभी अपने घर में सुख-समृद्धि और धन की वर्षा के लिए माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। चाहे वह दिवाली हो, शुक्रवार का दिन हो, या कोई विशेष अवसर, माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने की कोशिश हर कोई करता है। लेकिन कई बार हम देखते हैं कि पूरी श्रद्धा से पूजा करने के बाद भी हमें वह फल नहीं मिलता जिसकी हम उम्मीद करते हैं।

इसका कारण अनजाने में की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियाँ हो सकती हैं। शास्त्रों और वास्तु के अनुसार, लक्ष्मी पूजा के कुछ नियम हैं जिनका पालन न करने पर पूजा अधूरी मानी जाती है।

यहाँ हम आपको ऐसी ही 10 आम गलतियों के बारे में बता रहे हैं जो अक्सर लोग कर बैठते हैं, और साथ ही उनके सरल उपाय भी, ताकि आपकी पूजा सफल हो।

माँ लक्ष्मी की खड़ी मूर्ति का उपयोग करना

गलती: कई लोग अपने पूजा घर में माँ लक्ष्मी की खड़ी हुई मुद्रा (Standing posture) वाली तस्वीर या मूर्ति रख लेते हैं। क्यों है गलत: खड़ी हुई लक्ष्मी को ‘चंचला’ माना जाता है। इसका अर्थ है कि वह एक जगह नहीं टिकतीं। अगर आप ऐसी मूर्ति की पूजा करते हैं, तो धन आएगा तो सही, लेकिन रुकेगा नहीं, खर्च हो जाएगा। उपाय: घर में हमेशा बैठी हुई लक्ष्मी जी (कमल के फूल पर विराजमान) की मूर्ति या तस्वीर ही स्थापित करें। यह स्थिरता और संचित धन का प्रतीक है।

दिशा का ध्यान न रखना (गलत दिशा में पूजा)

गलती: अक्सर लोग जगह की कमी के कारण किसी भी दिशा में बैठकर पूजा कर लेते हैं, विशेषकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके। उपाय: लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उत्तम दिशा उत्तर (North) या पूर्व (East) मानी गई है। उत्तर दिशा कुबेर और लक्ष्मी जी की दिशा मानी जाती है। कोशिश करें कि मूर्ति पश्चिम दीवार पर हो और आपका मुख पूर्व की ओर, या मूर्ति दक्षिण दीवार पर हो और आपका मुख उत्तर की ओर हो।

माँ लक्ष्मी को अकेले पूजना

गलती: सिर्फ माँ लक्ष्मी की मूर्ति रखकर उनकी पूजा करना। क्यों है गलत: माँ लक्ष्मी कभी भी अकेले नहीं आतीं। उपाय: गृहस्थ लोगों को हमेशा माँ लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु या गणेश जी की पूजा करनी चाहिए।

  • नारायण के साथ: सुख-शांति और पारिवारिक प्रेम के लिए।
  • गणेश जी के साथ: बुद्धि और शुभ लाभ के लिए (ताकि धन का सही इस्तेमाल हो)।

दीपक को जमीन पर रखना

गलती: पूजा करते समय आरती का दीपक या अखंड ज्योत सीधे जमीन पर रख देना। क्यों है गलत: शास्त्रों में दीपक को बहुत पवित्र माना गया है, इसे सीधे धरती पर रखना उसका अपमान माना जाता है। उपाय: दीपक को हमेशा किसी पात्रे (प्लेट) में रखें या फिर दीपक के नीचे थोड़े से चावल (अक्षत) की ढेरी बनाकर उसके ऊपर रखें। यह लक्ष्मी जी को स्थाई बनाने का टोटका भी है।

बासी या सफेद फूल चढ़ाना

गलती: कई बार हम बासी फूल चढ़ा देते हैं या फिर माँ लक्ष्मी को सफेद फूल अर्पित करते हैं। उपाय:

माँ लक्ष्मी को लाल या गुलाबी फूल (जैसे कमल या लाल गुलाब) सबसे अधिक प्रिय हैं।

ध्यान रखें कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है, लेकिन गणेश जी और माँ लक्ष्मी की पूजा में (प्रत्यक्ष रूप से) तुलसी का प्रयोग वर्जित माना जाता है (हालांकि कुछ मतों में विष्णु पत्नी होने के नाते चढ़ाया जाता है, लेकिन सुरक्षित यह है कि आप कमल या गुलाब ही चढ़ाएं)।

मोगरा (सफेद फूल) खुशबूदार है, लेकिन पूजा में लाल फूलों को प्राथमिकता दें।

पूजा में लोहे या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल

गलती: पूजा की थाली, लोटा या घंटी स्टील या लोहे की होना। क्यों है गलत: पूजा-पाठ में लोहे और स्टील को अशुद्ध और नकारात्मक ऊर्जा का वाहक माना जाता है। उपाय: जहाँ तक संभव हो तांबे (Copper), पीतल (Brass), चाँदी या सोने के बर्तनों का ही उपयोग करें। अगर यह संभव न हो, तो पत्तों (जैसे केले के पत्ते) पर प्रसाद रखना स्टील की प्लेट से बेहतर है।

प्रसाद को सिर्फ “रख” देना

गलती: प्रसाद का भोग लगाकर उसे वहीं मंदिर में घंटों तक छोड़ देना। क्यों है गलत: मान्यता है कि भोग लगाने के कुछ समय बाद उसे भगवान ग्रहण कर लेते हैं। उसके बाद उसे वहां छोड़ने से उसमें नकारात्मकता आ सकती है या कीड़े लग सकते हैं। उपाय: भोग लगाने के कुछ देर बाद (आरती के बाद) प्रसाद को वहां से उठा लें और परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें। प्रसाद खुद भी खाएं, उसे फेंकें नहीं।

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मूर्ति का स्थान और रंग-रूप

गलती: टूटी हुई (खंडित) मूर्ति की पूजा करना या दो लक्ष्मी मूर्तियों को आमने-सामने रखना। उपाय:

घर में कभी भी खंडित मूर्ति न रखें, इसे जल प्रवाहित कर दें।

पूजा घर में लक्ष्मी जी की दो से अधिक मूर्तियाँ नहीं होनी चाहिए।

दीवार से सटाकर मूर्ति न रखें, कम से कम एक इंच की दूरी रखें।

आरती के दौरान जोर से ताली बजाना

गलती: लक्ष्मी जी की आरती करते समय बहुत जोर-जोर से ताली बजाना या शोर मचाना। क्यों है गलत: माँ लक्ष्मी को शोर-शराबा पसंद नहीं है, उन्हें शांति और मधुर वातावरण प्रिय है। उपाय: लक्ष्मी पूजन में छोटी घंटी का प्रयोग करें। ताली बजानी भी है तो बहुत सौम्य तरीके से। वातावरण को सुगंधित और शांत रखें।

पूजा के बाद तुरंत घर में अंधेरा करना

गलती: शाम की पूजा खत्म होते ही मंदिर का पर्दा गिरा देना या उस कमरे की लाइट बंद करके चले जाना। उपाय: पूजा के बाद कम से कम कुछ घंटों तक या पूरी रात एक घी का दीपक जलता रहना चाहिए। यदि मुख्य दीपक बुझने वाला हो, तो एक छोटी लाइट (Zero watt bulb) जलती रहने दें। लक्ष्मी जी के आगमन के लिए घर में प्रकाश होना आवश्यक है।

निष्कर्ष (Conclusion)

पूजा-पाठ में नियमों से ज्यादा महत्वपूर्ण है आपकी भावना और श्रद्धा। लेकिन, शास्त्रों में बताए गए ये नियम अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करने के लिए बनाए गए हैं।

अगली बार जब आप माँ लक्ष्मी की पूजा करें, तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। साफ़ मन, सही दिशा और सही विधि से की गई पूजा आपके घर में बरकत जरूर लाएगी।

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