2026 में कौन-कौन से बड़े हिन्दू पर्व हैं? (January to December)

हिन्दू कैलेंडर 2026: जानिए इस साल कब मनाई जाएगी होली, महाशिवरात्रि और राम नवमी (संपूर्ण व्रत और त्योहार सूची – भाग 1)

नमस्ते दोस्तों! भारतीय संस्कृति में त्योहारों का स्थान सिर्फ कैलेंडर की तारीखों तक सीमित नहीं है; ये हमारी आस्था, खुशी और एकजुटता का प्रतीक हैं। जैसे ही नया साल आता है, हर सनातनी के मन में सबसे पहला सवाल यही होता है—“इस बार होली कब है?” या “नवरात्रि कब से शुरू हो रहे हैं?”

वर्ष 2026 भक्ति और उत्साह से भरा रहने वाला है। अगर आप भी अपनी छुट्टियों, पूजा-पाठ और यात्राओं की योजना पहले से बनाना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए एक संपूर्ण गाइड है। इस पहले भाग में, हम जनवरी 2026 से जून 2026 तक के प्रमुख व्रतों और त्योहारों पर चर्चा करेंगे।

आइये जानते हैं, 2026 के शुरुआती 6 महीनों में कौन से बड़े पर्व हमारा इंतज़ार कर रहे हैं।

1. जनवरी 2026: सूर्य की उपासना और मकर संक्रांति

साल की शुरुआत पौष और माघ महीने की कड़कड़ाती ठंड और सूर्य देव की उपासना के साथ होती है।

  • मकर संक्रांति (14 जनवरी, बुधवार): यह साल का पहला बड़ा पर्व है। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उत्तरायण का पवित्र काल शुरू होता है। देश भर में इसे पोंगल, उत्तरायण या खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तिथियां:
    • पौष पुत्रदा एकादशी: 29 दिसंबर 2025 (गणना के अनुसार यह 2026 की शुरुआत में ही मानी जाएगी)।
    • षटतिला एकादशी: 14 जनवरी।

2. फरवरी 2026: बसंत पंचमी और महाशिवरात्रि की गूंज

फरवरी का महीना वसंत के आगमन और शिव भक्ति का महीना है।

  • बसंत पंचमी (23 जनवरी, शुक्रवार): (नोट: तिथि अनुसार यह कभी-कभी जनवरी अंत या फरवरी शुरुआत में पड़ती है, 2026 में यह 23 जनवरी के आसपास आ रही है)। यह दिन मां सरस्वती को समर्पित है। विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ होता है।
  • महाशिवरात्रि (15 फरवरी, रविवार): 2026 में महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाएगी। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का यह महापर्व इस बार रविवार को पड़ रहा है, जिससे छुट्टी की चिंता भी नहीं रहेगी।

3. मार्च 2026: रंगों का त्योहार होली और नवरात्रि का आरंभ

मार्च का महीना 2026 में सबसे ज्यादा हलचल भरा रहने वाला है क्योंकि इसी महीने होली और नवरात्रि दोनों हैं।

  • होलिका दहन (3 मार्च, मंगलवार): बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक।
  • धुलेंडी/होली (4 मार्च, बुधवार): रंगों का मुख्य त्योहार।
  • चैत्र नवरात्रि प्रारंभ (19 मार्च, गुरुवार): हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आरंभ इसी दिन से होगा। घटस्थापना के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है।
  • राम नवमी (27 मार्च, शुक्रवार): प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव। नवरात्रि का समापन इसी दिन होगा।

4. अप्रैल 2026: हनुमान जन्मोत्सव और अक्षय तृतीया

गर्मी की शुरुआत के साथ भक्ति का ताप भी बढ़ता है।

  • हनुमान जयंती (2 अप्रैल, गुरुवार): चैत्र पूर्णिमा के दिन बजरंगबली का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
  • अक्षय तृतीया (20 अप्रैल, सोमवार): इसे ‘अखा तीज’ भी कहते हैं। सोना खरीदने, गृह प्रवेश या किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए यह साल का सबसे शुभ ‘अबूझ मुहूर्त’ होता है।

5. मई और जून 2026: वट सावित्री और निर्जला एकादशी

इन महीनों में गर्मी अपने चरम पर होती है, लेकिन श्रद्धा में कोई कमी नहीं आती।

  • वट सावित्री व्रत (16 मई, शनिवार): सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करेंगी।
  • निर्जला एकादशी (27 मई, बुधवार): साल की सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और फलदायी व्रत। इस दिन बिना जल पिए व्रत रखा जाता है।
  • गंगा दशहरा (25 मई, सोमवार): मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का दिवस।

Part 2: 2026 में कौन-कौन से बड़े हिन्दू पर्व हैं? (July to December)

हिन्दू कैलेंडर 2026 (भाग 2): रक्षाबंधन से लेकर दिवाली और छठ पूजा तक की पूरी लिस्ट (Vrat Tyohar List 2026)

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आर्टिकल के पहले भाग में हमने जून तक के त्योहारों को देखा। अब बारी है साल के उस हिस्से की, जिसे हम सही मायनों में “Festive Season” कहते हैं। जुलाई से दिसंबर 2026 के बीच ही रक्षाबंधन का प्यार, गणेश उत्सव की धूम और दिवाली की रोशनी देखने को मिलेगी।

अगर आप 2026 में शादी-ब्याह, नए व्यापार या लंबी छुट्टियों की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह लिस्ट आपके बहुत काम आएगी। चलिए देखते हैं 2026 के उत्तराध (Second Half) का कैलेंडर।

6. जुलाई 2026: गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास

  • देवशयनी एकादशी (24 जुलाई, शुक्रवार): इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और ‘चातुर्मास’ शुरू हो जाता है। अगले चार महीनों तक मांगलिक कार्य (जैसे विवाह) वर्जित हो जाते हैं।
  • गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई, बुधवार): अपने गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन।

7. अगस्त 2026: सावन, राखी और कृष्ण जन्माष्टमी

अगस्त का महीना पूरी तरह से उत्सवों से भरा रहेगा।

  • नाग पंचमी (17 अगस्त, सोमवार): सावन के महीने में नाग देवता की पूजा।
  • रक्षाबंधन (28 अगस्त, शुक्रवार): भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक। इस बार शुक्रवार होने से एक लंबा वीकेंड मिल सकता है।
  • कृष्ण जन्माष्टमी (4 सितंबर, शुक्रवार): हालांकि यह सितंबर की शुरुआत में पड़ सकती है (पंचांग भेद के अनुसार), लेकिन कई बार यह अगस्त के अंत में भी आती है। 2026 में यह 4 सितंबर के आसपास संभावित है।

8. सितंबर 2026: गणेश चतुर्थी और श्राद्ध पक्ष

  • गणेश चतुर्थी (14 सितंबर, सोमवार): बप्पा का आगमन! 10 दिनों तक चलने वाला गणेश उत्सव इसी दिन से शुरू होगा।
  • अनंत चतुर्दशी/गणेश विसर्जन (23 सितंबर, बुधवार): बप्पा की विदाई।
  • पितृ पक्ष (श्राद्ध) प्रारंभ: सितंबर के अंतिम सप्ताह से पितरों का तर्पण शुरू होगा।

9. अक्टूबर 2026: शारदीय नवरात्रि और दशहरा

अक्टूबर 2026 में देवी मां की आराधना का दौर चलेगा।

  • शारदीय नवरात्रि प्रारंभ (11 अक्टूबर, रविवार): माता रानी के भक्तों के लिए सबसे पावन दिन। कलश स्थापना इसी दिन होगी।
  • दुर्गा अष्टमी (18 अक्टूबर, रविवार): कन्या पूजन का मुख्य दिन।
  • दशहरा/विजयदशमी (20 अक्टूबर, मंगलवार): रावण दहन और शस्त्र पूजन का पर्व।
  • करवा चौथ (29 अक्टूबर, गुरुवार): सुहागिनों का सबसे बड़ा व्रत।

10. नवंबर 2026: दीपों का उत्सव दिवाली

नवंबर साल का सबसे रोशन महीना होगा। 2026 में दिवाली नवंबर के दूसरे सप्ताह में है।

  • धनतेरस (6 नवंबर, शुक्रवार): खरीदारी के लिए शुभ दिन।
  • नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली (7 नवंबर, शनिवार)।
  • दीपावली (8 नवंबर, रविवार): मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा। चूंकि यह रविवार को है, तो नौकरीपेशा लोगों की एक छुट्टी कम हो जाएगी, लेकिन उत्साह वही रहेगा!
  • गोवर्धन पूजा (9 नवंबर, सोमवार)।
  • भाई दूज (10 नवंबर, मंगलवार)।
  • छठ पूजा (14 नवंबर, शनिवार): सूर्य षष्ठी या डाला छठ। बिहार और उत्तर भारत का महापर्व। डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

11. दिसंबर 2026: साल का समापन

  • गीता जयंती: दिसंबर के मध्य में (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी)।
  • मोक्षदा एकादशी: साल की अंतिम बड़ी एकादशियो में से एक।

निष्कर्ष (Conclusion)

2026 का वर्ष भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण है। चाहे वह फरवरी की महाशिवरात्रि हो या नवंबर की दिवाली, हर त्योहार हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है।

एक जरूरी सलाह: हिन्दू त्योहार तिथियों (Tithi) पर आधारित होते हैं, जो चंद्रमा की स्थिति के अनुसार बदलती हैं। इसलिए, त्योहार के नजदीक आने पर अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से सटीक मुहूर्त (Exact Muhurat) की पुष्टि अवश्य कर लें।

आप सभी को आने वाले वर्ष 2026 के लिए अभी से ढेरों शुभकामनाएं!

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