
“बेटा/बेटी की शादी कब होगी?”
यह एक ऐसा सवाल है जो भारतीय परिवारों में सबसे ज्यादा पूछा जाता है। चाहे लड़का हो या लड़की, जैसे ही वे 20-25 की उम्र पार करते हैं, माता-पिता (और कभी-कभी खुद वे भी) यह जानने को उत्सुक हो जाते हैं कि शहनाई कब बजेगी।
वैसे तो कहा जाता है कि “जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं”, लेकिन ज्योतिष शास्त्र (Vedic Astrology) में कुछ ऐसे गणित और सूत्र हैं, जिनसे हम धरती पर यह पता लगा सकते हैं कि वो जोड़ी कब सामने आएगी।
आज के इस आर्टिकल में हम बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे कि एक ज्योतिषी आपकी कुंडली देखकर शादी के समय का सटीक अनुमान कैसे लगाता है।
1. शादी का घर: कुंडली का सातवां भाव (The 7th House)
सबसे पहले बेसिक्स को समझते हैं। आपकी जन्म कुंडली में कुल 12 खाने (Houses) होते हैं। इनमें से ‘सातवां भाव’ (7th House) सबसे महत्वपूर्ण है।
- यह भाव आपके जीवनसाथी, विवाह और साझेदारी का होता है।
- अगर इस घर में शुभ ग्रह (जैसे शुक्र, गुरु, बुध) बैठे हों, तो शादी जल्दी और सुखद होती है।
- अगर यहाँ पापी ग्रह (जैसे शनि, राहु, केतु) आ जाएं, तो शादी में देरी या बाधाएं आती हैं।
2. शादी कराने वाले मुख्य ग्रह (The Matchmakers)
ज्योतिष में दो ग्रह ऐसे हैं जो “वेडिंग प्लानर” की भूमिका निभाते हैं। इनके बिना शादी होना मुश्किल होता है:
- शुक्र (Venus): लड़कों (Men) की कुंडली में पत्नी का कारक ‘शुक्र’ होता है। अगर शुक्र मजबूत है, तो सुंदर और अच्छी पत्नी मिलती है।
- गुरु (Jupiter): लड़कियों (Women) की कुंडली में पति का कारक ‘गुरु’ (बृहस्पति) होता है। गुरु की कृपा के बिना लड़की का विवाह तय होना मुश्किल होता है।
3. शादी का सही समय कैसे निकालें? (The Timing Technique)
अब आते हैं मुख्य सवाल पर—“कब?”। ज्योतिषी मुख्य रूप से दो चीजों का मिलान करते हैं: दशा और गोचर।
A. महादशा और अंतर्दशा (Dasha System)
सिर्फ कुंडली में योग होने से शादी नहीं होती, सही समय (दशा) का आना भी जरूरी है। शादी तब होती है जब:
- सप्तमेश की दशा: सातवें घर के स्वामी (7th Lord) की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो।
- शुक्र या गुरु की दशा: विवाह कारक ग्रहों की दशा चल रही हो।
- राहु/केतु: कई बार राहु की दशा में भी अचानक शादी के योग बनते हैं।
B. गोचर (Planetary Transit)
दशा “प्रॉमिस” है, और गोचर “डिलीवरी” है। जब गुरु (Jupiter) और शनि (Saturn) दोनों एक साथ कुंडली के सातवें भाव या सातवें भाव के स्वामी को देखते हैं (दृष्टि डालते हैं), तब शादी का ‘डबल ट्रांजिट’ (Double Transit) योग बनता है।
सरल भाषा में: जब गुरु आशीर्वाद दें और शनि काम पक्का करें, तब शादी होती है।
4. शादी में देरी क्यों होती है? (Reasons for Delay)
कई बार सब कुछ ठीक होने पर भी रिश्ता पक्का नहीं हो पाता। इसके पीछे ये ग्रह जिम्मेदार हो सकते हैं:
- शनि (Saturn): शनि का काम है विलंब करना। अगर यह 7वें घर में है या उसे देख रहा है, तो शादी 28 या 30 साल के बाद ही होती है।
- मांगलिक दोष (Mangal Dosh): अगर मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, तो इसे मांगलिक दोष कहते हैं, जो रिश्ते तय होने में अड़चनें पैदा करता है।
- सूर्य (Sun): सूर्य एक अलगाववादी ग्रह है। इसका सातवें घर में होना शादी में देरी या ईगो (Ego) की समस्या दे सकता है।
5. शीघ्र विवाह के लिए छोटे उपाय
अगर कुंडली में देरी के योग हैं, तो निराश न हों। ज्योतिष में उपाय भी हैं:
- लड़कियों के लिए: गुरुवार का व्रत रखें और केले के पेड़ की पूजा करें (गुरु ग्रह मजबूत होगा)।
- लड़कों के लिए: शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की उपासना करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें (शुक्र ग्रह मजबूत होगा)।
- शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करना सबके लिए लाभकारी होता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
जन्म कुंडली से शादी का समय जानना एक गणित है, कोई जादू नहीं। यह हमें एक ‘संभावित समय’ (Time window) बताती है। लेकिन याद रखें, कर्म सबसे बड़ा है। सही समय पर प्रयास करना और सामाजिक मेल-जोल बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है जितना कि ग्रहों का साथ।
अगर आप अपनी सटीक डेट जानना चाहते हैं, तो किसी विद्वान ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण जरूर करवाएं।


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