
जय माता दी!
हम सभी के घरों में माता रानी (माँ दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती) का एक विशेष स्थान होता है। हम सिर्फ उनकी पूजा ही नहीं करते, बल्कि उनसे भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। हर कोई चाहता है कि मातारानी की कृपा से घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहे।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जाने-अनजाने में हम भक्ति भाव में माता की कुछ ऐसी तस्वीरें या मूर्तियाँ घर ले आते हैं, जो वास्तु शास्त्र के अनुसार ‘गृहस्थ जीवन’ (family life) के लिए शुभ नहीं मानी जातीं?
अक्सर हमें लगता है कि भगवान का हर रूप शुभ है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार देवताओं के ‘रौद्र’ (क्रोधित) और ‘सौम्य’ (शांत) रूपों का प्रभाव अलग-अलग होता है। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि घर के मंदिर में माता रानी की कैसी तस्वीर नहीं होनी चाहिए और क्यों
1.युद्ध करती हुई या ‘महिषासुर मर्दिनी’ का रौद्र रूप
हम अक्सर माता दुर्गा की वह तस्वीर देखते हैं जिसमें वह महिषासुर नामक राक्षस का वध कर रही होती हैं। यद्यपि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन वास्तु के अनुसार घर में युद्ध के दृश्यों वाली तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए।
कारण: ऐसी तस्वीरों में माता ‘आक्रामक’ मुद्रा में होती हैं। घर शांति और प्रेम की जगह है। युद्ध की मुद्रा घर के सदस्यों के स्वभाव में गुस्सा, तनाव और आक्रामकता बढ़ा सकती है।
2.खुले बाल और क्रोधित मुद्रा
माता काली या दुर्गा के कुछ स्वरूपों में उनके बाल खुले होते हैं और चेहरा क्रोध से भरा होता है। तंत्र साधना के लिए ये रूप पूजनीय हैं, लेकिन एक सामान्य गृहस्थ परिवार के लिए नहीं।
कारण: ऐसी तस्वीरें घर में अशांति ला सकती हैं। हमेशा माता का वह रूप चुनें जिसमें उनके बाल व्यवस्थित हों और चेहरे पर हल्की मुस्कान हो।
3.शेर की दहाड़ वाली तस्वीर
माँ दुर्गा की सवारी शेर (सिंह) है। लेकिन तस्वीर चुनते समय ध्यान दें कि शेर का मुंह बंद हो।
कारण: अगर शेर का मुंह खुला है और वह दहाड़ रहा है, तो इसे ‘भय’ और ‘अस्थिरता’ का प्रतीक माना जाता है। ऐसा चित्र घर के लोगों में मानसिक डर या घबराहट पैदा कर सकता है। शांत बैठा हुआ शेर शुभ होता है।
4.खंडित या टूटी हुई मूर्ति
कई बार हम पुरानी मूर्तियों या तस्वीरों से इतना जुड़ जाते हैं कि उनके हल्का सा खंडित (टूटा हुआ) होने पर भी उन्हें हटाते नहीं हैं।
कारण: वास्तु शास्त्र में खंडित मूर्ति की पूजा करना वर्जित है। इसे तुरंत बहते जल में विसर्जित कर देना चाहिए और नई, सुंदर प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। खंडित मूर्ति घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को आकर्षित करती है।
कैसी तस्वीर लगाना है सबसे शुभ?
घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए हमेशा ‘सौम्य रूप’ की स्थापना करें:
- मुस्कुराता हुआ चेहरा: जिसमें माता रानी अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रही हों (वरद मुद्रा)।
- परिवार के साथ: शिव-पार्वती या गणेश-कार्तिकेय के साथ बैठी हुई माता की तस्वीर पारिवारिक प्रेम बढ़ाती है।
- कमल पर विराजमान: माँ लक्ष्मी या सरस्वती की कमल पर बैठी हुई तस्वीर धन और विद्या के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
सही दिशा का भी रखें ध्यान (Vastu Tips for Direction)
सिर्फ सही तस्वीर ही नहीं, सही दिशा भी मायने रखती है। वास्तु के अनुसार:
- ईशान कोण (North-East): माता रानी की स्थापना के लिए घर का सबसे पवित्र स्थान उत्तर-पूर्व (North-East) कोना होता है।
- पूजा करते समय मुख: मूर्तियों को इस तरह रखें कि पूजा करते समय आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर हो।
- दक्षिण दिशा से बचें: दक्षिण दिशा (South) यम की दिशा मानी जाती है, इसलिए मंदिर का मुख कभी भी दक्षिण की तरफ न रखें।
निष्कर्ष
माता रानी तो भाव की भूखी हैं, लेकिन हमारे ऋषियों ने वास्तु के जो नियम बनाए हैं, वे हमारे जीवन को संतुलित करने के लिए हैं। घर में वही तस्वीरें रखें जो देखते ही मन को ‘सुकून’ और ‘शांति’ दें, न कि भय या क्रोध।
अगर आपके मंदिर में भी कोई ऐसी उग्र तस्वीर है, तो उसे सम्मानपूर्वक किसी मंदिर में दान कर दें या विसर्जित कर दें और घर में माता का शांत स्वरूप स्थापित करें।
क्या आपके घर में माता की सही तस्वीर सही दिशा में रखी है? कमेंट में ‘जय माता दी’ लिखकर जरूर बताएं!
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और वास्तु शास्त्र पर आधारित है। किसी भी बड़े बदलाव के लिए आप अपने पारिवारिक पंडित या वास्तु विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं।


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